Nvabihan
शुक्रवार, 20 जून 2014
अनठेरहा
अनठेरहा
— वि.पु. (स्त्री.अनठेरहिन(ही) 1.वह जिसकी नजर ठहर नहीं सकती, अस्थिर पुतली वाला। 2.वक्रदृष्टि वाला। 3.बनती हुई बात को बिगाड़ने वाला। 4.लक्षणा में बातें करने वाला।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
भारतीय गणना
आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!
छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है
कारण और निदान कर्म संस्कृति का जनक है और संवाहक भी। व्यक्तिसः या सामूहिक रुप से किये गये धर्मनिष्ठ कर्म का कालान्तर में पुनरावृत्ति होते रहन...
Karma Aarti
गोंडवाना समाज
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें