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बुधवार, 8 जून 2016

छोंड़-छाँड़ के बइठना

छोंड़-छाँड़ के बइठना : धनी ला तियागना। (पति को त्याग देना)
बइसाखिन ला दू बच्छर पुरत होही छोंड़-छाँर के बइठे। समे निकलत देरी नइ लागे।

छोटे आँखी के होना

छोटे आँखी के होना : नीयत डोलना (नीयत खोर होना)
जउन हा छोटे आँखी के हो गेहे तउन ला फजित्ता के का डर?

छोटकुन जी होना

छोटकुन जी होना : डर्रा जाना। (डर जाना)
पेड़ मा चढ़के भुइयाँ ला देखेंव, ततकिच मा मोर जी हा छोटकुन होगे रिहिसे।

छेरी के गर मा फड़फड़ी बाँधना

छेरी के गर मा फड़फड़ी बाँधना : अयोग्य मनखे ला जुम्मेदारी देना। (अयोग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी देना)
छेरी के गर मा फड़फड़ी बाँधे ले बुता सीध नइ होय, उल्टा बिगड़ जथे।

छेरिया होना

छेरिया होना : घेरी-बेरी खाना। (बार-बार खाना)
यहू टूरा हा छेरिया हो गेहे, एक घाँव खा के नइ रहि सके।

छू मंतर होना

छू मंतर होना : (i) बड़ भागना (तेज दौड़ना) 
बढ़िया बइला पाए हस फिरंता, एके चमेटा मा छू मंतर हो जथे।
(ii) गायब होना (यथावत)
जादू वाले हा अपन जादू चलइस ते लइका के मुँदरी हा छू मंतर होगे।

छूछू कस छुछवाना

छूछू कस छुछवाना : लुका-लुका के खोजना। (छिप-छिप कर ढूँढना)
तोला का चाही तेला बता ना, छूछू कस छुछवात काबर हस?

छुनमुन-छुनमुन लागना

छुनमुन-छुनमुन लागना : कुछु खाए के मन करना। (कुछ खाने का मन होना)

छुआ होना

छुआ होना : महीना बइठना। (रजस्वला होना)
ओला छुआ हो गेहे तेकर सेती देंवता-धामी के जगा मा नइ जाए।

छींकब मा नाँक कटाना

छींकब मा नाँक कटाना : बात-बात मा लजाना। (बात-बात पर शमार्ना)
छींकब मा नाँक कटाए ले नाटक नइ होय, नकटा बने ला परथे।

छींक-छाँक करना

छींक-छाँक करना : जुड़ धरना। (सर्दी लगना)
काली बारिस मा भींग गेंव ते छींक-छाँक सुरु होगे। थोरको ऊँच-नीच नइ सहाय।

छान्हीं मा होरा भूँजना

छान्हीं मा होरा भूँजना : बहुँत अतियाचार करना। (बहुत अत्याचार करना)

एकलौता बर घर भर के मयाँ पलपलाए रथे तेकरे सेती छान्हीं मा होरा भूँजथे।

मंगलवार, 7 जून 2016

छान्हीं मा नाचना

छान्हीं मा नाचना : नंगत उतिय इल करना। (अधिक उत्पात मचाना)
छान्हीं मा नाचे ले आज तक कोनो नइ बने हे, बल्कि बेंदरा-बिनास जरुर हो जथे।

छान्हीं चढ़ के कूदना

छान्हीं चढ़ के कूदना : जान-बूझ के बिपत मा फँसना। (जान-बूझकर विपत्ति में फँसना)
सुख-दुख तो जिनगी के दू ठन पाठ आय, फेर कोनो हा छान्हीं चढ़ के कूदही तउन ला कइसे कर डारबे।

छाती रगरगाना

छाती रगरगाना : ईरसा होना। (ईर्ष्या होना)
परोसी के बनक ला देख के तोर छाती काबर रगरगावत हे?

छाती मा बान मारना

छाती मा बान मारना : अनठेहरी गोठियाना। (व्यंग्य बोलना)
तोर का बिगाड़े हन तेमा हमर छाती मा बान मारत हस?

छाती मा बइठना

छाती मा बइठना : अपन बुता ला तुरते कमाए के जिद्द करना। (अपने कार्य को तत्काल करने का जिद्द करना)
सरकारी काम मा समे लागथे, छाती मा बइठे ले नइ होय।

छाती मा पथरा लदकना

छाती मा पथरा लदकना : हिरदे ला कड़ा करना। (हृदय को कठोर करना)
भरे जवानी मा गोसइयाँ हा आँखी मूँदलिस, तब ले बिचारी दुखिया हा अपन छाती मा पथरा लदक के जीय त हे।

छाती मा दार दरना

छाती मा दार दरना : नंगत के दुख देना। (बहुत दुख देना)
सुकवारो हा रोज अपन सउतबेटा के छाती मा दार दरत रथे। देखइया ला घलो बपरा लइका बर सोग लागथे।

छाती मा चघना

छाती मा चघना : पाछू पड़ना। (पीछे पड़ना)
मुहूँ ले निकलते साठ छाती मा चघे ले बुता नइ बने, थीर-थार ले होथे।

भारतीय गणना

आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!