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रविवार, 6 नवंबर 2016

जंगली प्याज़ : कमर और घुटनों के दर्द के लिये रामबाण इलाज

एक ज़माना था जब अपने आपको नपुंसक अनुभव करने वालो को जमकर लूटा जाता था हर जगह। “नाकाम मर्द निराश ना हों” के विज्ञापन देखने को मिल जाते थे ट्रेन में सफ़र करते हुये शहर आने से पहले ना जाने कितने हकीम, वैद्य और डॉक्टरों के विज्ञापन नपुंसक लोगों को महामर्द बनाने का दावा करते हुये दिखाई दे जाते थे। समय बदला अब लोगों से टी.वी. के विज्ञापनों के द्वारा उगाही शुरू हो गई। इस समय अधिकाँश शातिर लोगों के निशाने पर गंजेपन, घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोग आ गये हैं। इसमें मुझे गंजे लोगों को लूटने वालों पर बहुत गुस्सा आता है क्योंकि एक गंजा इंसान बहुत निरीह और मासूम होता है। उसकी बेचारगी की इन्तेहा देखिये कई बार ठगे जाने के बाद भी वह गंजापन दूर करने वाले नये दावेदार के झाँसे में आ ही जाता है।

बहरहाल आज लेख लिखने का मेरा उद्देश्य घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोगों को व्यर्थ के खर्चे से बचाना है। इन दिनों अन्नू कपूर अस्थिजीवक नाम की दवा का भेराभूत विज्ञापन कर रहे हैं। जब भी टी.वी. खोलो ये महाशय बड़े अपनेपन के साथ पूरे देश के घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोगों कों दर्द से राहत दिलाने के दावे करते नज़र आ जाते हैं।
निश्चित रूप से आयुर्वेद में कई औषधियाँ बेमिसाल हैं लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि लोगों की जेब तराशी की जाये। जो लोग ढाई हज़ार की अस्थिजीवक दवा मंगा चुके हैं उन्हें कितना लाभ हुआ होगा यह तो मैं नहीं जानता, लेकिन मैं आपको एक रामबाण दर्द निवारक दवा के बारे में बताता हूँ।

प्याज जैसी दिखने वाली यह “जंगली प्याज” (indian squill) इन दिनों जंगलों में भरपूर मात्रा में ऊग रही है जहाँ हम लोगों ने वृक्षारोपण किया हुआ है वहाँ यह प्रचुर मात्रा में ऊग रही है। आपको सिर्फ इतना करना है कि इसे प्याज की तरह क़तर कर शुद्ध सरसों के तेल में तब तक तलना (फ्राय करना ) है जब तक वो काली ना पड़ जाय। (दौ सौ ग्राम तेल में जंगली प्याज की दो गाँठें)।
फिर उस तेल को कपड़े से छानकर एक बोतल में सहेज कर रख लीजिये और रोज दो बार घुटनों की मालिश कीजिये दर्द ऐसे खत्म हो जायेगा जैसे कभी था ही नहीं, यह घुटने के दर्द के लिये रामबाण है और लगभग मुफ्त है। चूँकि हम प्रतिदिन यहाँ पौधों पक्षियों की सेवा करते हैं इसलिये घास के बीच इस कंद को पहचान जाते हैं। एक अनजान व्यक्ति के लिये यह कठिन होगा इसलिये फोटो संलग्न है। घास के बीच में लम्बी पत्तियों वाली वनस्पति जंगली प्याज है।


ध्यान रहे इसे खाने का प्रयास ना करें यह जहरीली होती है।
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– अजित भोंसले

मंगलवार, 19 जुलाई 2016

अलसी से पाइये सम्पूर्ण पोषण

क्या आप अलसी के बारे में नहीं जानते तो जान लीजिये, क्योंकि ये गुणों की खान है। अलसी (Alsi or Flax Seeds)  तिल के बीज से थोड़े बड़े आकार में होती है। खाने में इसका प्रयोग बेक की जाने वाली रेसिपी पर छिड़क कर या इसे पीस कर लड्डूओं या कुकीज़, केक आदि में प्रयोग किया जाता है। यदि आप बिना अंडे के केक आदि बनाना चाहते हैं तो अंडे के विकल्प के रूप में भी अलसी के पिसे हुए चूरे को या अलसी के बीज को भिगो कर पीसकर प्रयोग कर सकते हैं।

इसमें प्रोटीन, फाइबर, लिग्नन, ओमेगा-3 फेटी एसिड, विटामिन-बी ग्रुप, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक, सेलेनियम आदि तत्व होते हैं। अश्वगंधा व हरी सब्जियों में पाया जाने वाला विटामिन नियासीन भी अलसी में प्रचुरता से होता है।


अलसी रक्तचाप को संतुलित रखती है, कॉलेस्ट्रॉल (LDL-Cholesterol)  की मात्रा को कम करती है, दिल की धमनियों में खून के थक्के बनने से रोकती है, हृदयघात व स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव करती है, हृदय की गति को नियंत्रित रखती है और वेन्ट्रीकुलर एरिदमिया से होने वाली मृत्युदर को बहुत कम करती है। यह कब्ज और बबासीर के लिये बहुत कारगर है।

अलसी के एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं जिससे त्वचा आकर्षक, कोमल, नम व बेदाग रहती है। यह स्वस्थ त्वचा जड़ों को भरपूर पोषण दे कर बालों को भी स्वस्थ, चमकदार व मजबूत बनाती है।

अलसी के बीज के चमत्कारों का हाल ही में खुलासा हुआ है कि इनमें 27 प्रकार के कैंसररोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाये जाने वाले ये तत्व कैंसररोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम में अलसी का सेवन कारगर है। दूसरा महत्वपूर्ण खुलासा यह है कि अलसी के बीज सेवन से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा तीव्रतर होती है।

कैसे खायें अलसी के बीज
अलसी को धीमी आँच पर हल्का भून ले्ं। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख ले्ं। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ ले्ं। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिये, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिये थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखे्ं। अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए्। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा माँगता है।

एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आँच पर पकायें जब तक कि यह पानी आधा न रह जाये। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करे्ं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा आदि के उपचार में उपयोगी है।

अलसी के बीज के चूरे को रोटी, दूध, दाल या सब्जी की ग्रेवी में मिलाकर खाया जा सकता है। प्रति व्यक्ति पाँच ग्राम से दस ग्राम तक अलसी का खाना स्वास्थ्य के लिये गुणकारी रहता है।

अलसी को नमक लगे पानी में भिगो कर फिर सूखाकर सेक लें, फिर इसे खाना खाने के बाद मुखवास के तौर पर भी खाया जा सकता है।
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विशेष : अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एसिड थायरायड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने में आवश्यक भूमिका निभाता है। हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को अलसी और अलसी के तेल का प्रयोग जरूर करना चाहिये।
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गर्मी में आप इसकी मात्रा आधी कर लें। 

रविवार, 3 जुलाई 2016

दिन में चार चम्मच और कैंसर गायब !

दिन में चार चमच और कैंसर गायब ! रूस के मशहूर वैज्ञानिक ने बनाई एक शक्तिशाली औषधि...!

दुनिया भर के अरबों लोग कैंसर से पीड़ित हैं, आज के समय की यह सबसे घातक बीमारी है, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि यह रूसी वैज्ञानिक Hristo Mermerski द्वारा की गई खोज से कैंसर को प्राकृतिक उपचार द्वारा ठीक किया जा सकता है।

रूस के एक वैज्ञानिक Hristo Mermerski ने घर में बनाई जाने वाली एक ऐसी औषधि इजाद की है जिसके इस्तेमाल से बहुत सी भिन्न-भिन्न प्रकार की बीमारियों अथवा कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी से भी बचा जा सकता है।

ये औषधि कई प्रकार के कैंसर के इलाज में फायदेमंद हो सकती है-

औषधि तैयार करने की सामग्री-
  • 400 ग्राम ताज़ा अखरोट
  • 400 ग्राम अँकुरित अनाज (Sprouted Grains)
  • 1 किलो प्राकृतिक शहद
  • 12 ताज़ा लहसुन की कलियाँ
  • 15 ताज़ा नीबू
अंकुरित अनाज (sprouted grains ) तैयार करने का तरीका –
अनाज को एक काँच के बर्तन में रख दें उसमें उतना ही पानी डालें जिससे अनाज अच्छी तरह भीग जाये। इसे एक रात के लिये इसी तरह छोड़ दें… अगली सुबह अनाज को छान कर पानी निकाल दें फिर अच्छी तरह पानी से धोने के बाद अनाज में से सारा पानी निकल दें। पानी निकालने के बाद अनाज को दोबारा कांच के बर्तन में डाल कर 24 घंटे तक रख दें। इससे अँकुरित अनाज तैयार हो जायेगा।

औषधि तैयार करने का तरीका –
लहसुन की कलियाँ, अखरोट और अँकुरित अनाज को ले कर एक साथ पीस लें।
5 नीबू लेकर बिना छिलका उतारे पीस लें।
(बाकि के 10 नीबुओं का रस निकालकर मिश्रण में मिला लें।)
सभी चीज़ों को अच्छे से मिला लें।

अब इस मिश्रण में शहद मिलायें इसे मिलाने के लिये लकड़ी के चम्मच का इस्तेमाल करें। इस मिश्रण को एक काँच के बर्तन में भर लें और फ्रिज़ (fridge) में रख दें। इसे तीन दिनों के लिये फ्रिज़ में रखें और आगे बताये अनुसार इसका सेवन करे-

Hristo Mermerski के अनुसार इसे सोने से आधा घंटा पहले लें और हर बार खाना खाने से आधा घंटा पहले लें। अगर आप इस औषधि का इस्तेमाल कैंसर के इलाज के लिये कर रहें हों तो हर 2 घंटे में 1– 2 चमच लें।

Hristo Mermerski के अनुसार ये औषधि लम्बी उम्र और स्वस्थ जीवन के लिये सहायक है। ये कैंसर के इलाज में बहुत लाभकारी है और साथ ही जवान दिखने और शारीरिक ताकत के लिये भी फायदेमंद है। ये शरीर में मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है , गुर्दों और लीवर को साफ़ करता है, शरीर में बीमारिओं से लड़ने की शक्ति पैदा करता है और दिल के दौरे से बचाता है।

अगर आपको ये जानकारी लाभकारी लगे तो इसके बारे में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बताना ना भूलें।

मंगलवार, 28 जून 2016

बिच्छु काटने पर तुरंत आराम के लिए 4 रामबाण उपाय

गाँवों या शहरों में अक्सर कच्ची जगह या बरसात में घर में बिच्छू निकल आते हैं, अगर ये काट ले तो भयंकर पीड़ा होती है, और इनके ज़हर चढ़ने का भी खतरा रहता है, ऐसे में ये रामबाण उपाय सिर्फ 2 मिनट में ज़हर को उतार देगा और दर्द शांत कर देगा...! आइये जाने इस रामबाण उपचार को-

1. बिच्छू के काटने पर रामबाण फिटकरी का प्रयोग
  • फिटकरी को किसी साफ़ किये हुए पत्थर पर, थोड़ा सा पानी डालकर चंदन की तरह घिसें... फिर जहाँ पर बिच्छु ने काटा हो वहाँ पर इस फिटकरी का लेप लगाकर, आग से थोड़ा सेंकें। कैसा भी जहरीला बिच्छु का काटा क्यों न हो, इस फिटकरी के प्रयोग से जहर सिर्फ दो ही मिनट में उतर जाता है।
  • फिटकरी को चिमटी से पकड़ कर थोडा गर्म कर लीजिये, जैसे ही फिटकरी पिघलने लगे तो फिटकरी को बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लगा दीजिये, फिटकरी तुरंत वहाँ चिपक जायेगी, और पूरा ज़हर चूसकर अपने आप उतर जायेगी।


2. बिच्छु काटने पर इमली का बीज
इमली के बीज को साफ़ पत्थर पर घिंसें, घिसते-घिसते अन्दर का सफ़ेद भाग निकल आयेगा तो उसे भी बिच्छु के काटने के स्थान पर लगा देंगे तो यह चिपक जायेगा, जैसे ही नीचे गिरे तो दूसरा बीज घिसकर लगाइये... इस प्रकार बिच्छु का ज़हर उतर जाता है।


3. बिच्छु काटने पर माचिस का मसाला
बिच्छु के डंक मारने पर माचिस की 5-6 तीलियों के मसाले को निकालकर पानी में घोलकरर बिच्छु के डंक लगे स्थान पर लगाने से तत्काल बिच्छु का जहर उतर जाता है। इससे मधुमक्खी व बर्रे के काटने पर लगाने से भी जहर नहीं फैलता और तुरन्त आराम मिलता है।


4. बिच्छू काटने पर सेंधा नमक
बिच्छू के डंक मार जाने पर अगर ज़हर का स्थान ना मिले तो ऐसे में ये उपाय बेहद लाभकारी है। लाहोरी (सेंधा नमक) पंद्रह ग्राम और साफ़ पानी 75 ग्राम आपस में मिलकर साफ़ शीशी में भर कर रखे लें... बस दवा तैयार है... बिच्छु काटने पर आँखों में सलाई (सुरमा लगाने वाली) की सहायता से आँखों में एक एक बूँद डाल दीजिये, कुछ ही मिनटों में ज़हर उतर जायेगा... ये प्रयोग अन्य प्रयोगों के साथ भी किया जा सकता है।

बिच्छु काटने पर विशेष

1. उग्र विष वाले बिच्छु जिसकी दुम धरती पर घिसटती चलती है, के काटने पर, अगर किसी ऐसी जगह काटा हो जहाँ पटी बांध सकें तो बांध दें जैसे की हाथ, पैर या जाँघ पर, जहाँ काटा गया हो वहाँ से चार ऊँगली ऊपर बाँध देना चाहिये फिर उसके चार ऊँगली ऊपर फिर से बाँध दें। ऐसा करने से विष पूरे शरीर में नहीं फैलेगा।

2.यदि डंक दंश स्थान में रह गया हो तो किसी सेफ्टीपिन या चिमटी को आग की लौ में गर्म करने के बाद त्वचा में घुसे हुए डंक को उसकी सहायता से निकाल देना चाहिए और बिना समय नष्ट करें उपरोक्त उपचारों में से एक उपचार कर लेना चाहिये।

3. बारीक़ पिसा हुआ सेंधा नमक को प्याज के टुकड़े से उठाकर दंश-स्थान पर मले, इससे जहर और डंक दोनों दूर होंगे।

रविवार, 22 नवंबर 2015

सेहत का बादशाह खजूर

एनर्जी- खजूर एनर्जी के बड़ा स्त्रोत है। इसमें प्राकृतिक शुगर जैसे ग्लोकोज, सुक्रोज और फ्रुक्टोज पाई जाती है। ज्यादा एनर्जी के लिए खजूर को दूध के साथ लें। इससे यह एक अच्छा पोषक स्नेक्स बन जाता है।
कब्ज- अगर आप कब्ज से परेशान हैं तो खजूर इसमें बहुत फायदेमंद है। कब्ज दूर करने के लिए रात को खजूर भिगोकर रखें और सुबह खा लें। जिस पानी में आपने खजूर भिगोये थे। वह भी लाभदायक है।
बालों का झड़ना रोके- खजूर बालों के लिए बहुत अच्छे होते हैं। रोजाना 2-3 खजूर खाने से बाल मजबूत और हेल्दी बनते हैं। खजूर का तेल भी बालों को झड़ने से बचाता है।

एनिमिया- खजूर में भारी मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो एनिमिया के इलाज में बहुत फायदेमंद है। इसे ज्यादा मात्रा में भी खाया जा सकता है क्योंकि यह शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं डालता।

एंटीएजिंग- खजूर में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है और आपकी स्किन को जवाँ बनाता है और झुर्रियाँ मिटाता है। खजूर स्किन की समस्याओं को दूर करता है।

कैंसर- खजूर का बॉडी पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और यह पूरी तरह से प्राकृतिक है। खजूर पेट के कैंसर की जोखिम को कम करता है। साथ ही खजूर से आँखों की रोशनी तेज होती है और रात के वक्त होने वाले अंधेपन से भी बचाता है।

लो फैट- खजूर कोलेस्ट्रॉल फ्री होते हैं मोटापा नहीं बढ़ता है। इसमें विटामिन्स और मिनरल्स पाये जाते हैं। साथ ही यह पाचन तंत्र को भी दुरूस्त रखता है। इसमें बहुत कम कैलोरी पाई जाती है।

त्वचा संबधी समस्या- 2-3 खजूर खाने से स्किन समस्या में फायदा होता है।

गुड़ एक ऐसा शानदार मेवा

सर्दियों में खाये जाने वाले पौष्टिक पदार्थों में गुड़ एक ऐसा शानदार मेवा है जिससे ना केवल आपकी सेहत में चार चाँद लग जाते हैं बल्कि आपके बाल, हड्डियाँ और सम्पूर्ण सेहत सुधर जाती है। गुड़ आपकी मीठा खाने की चाहत तो पूरी करता ही है, साथ ही आपकी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

झुर्रियाँ और पिंपल्स- गुड़ में भरपुर विटामिन और मिनरल्स पाये जाते हैं, जो स्किन को पोषित करते हैं। गुड़ से स्किन सॉफ्ट, हेल्दी, हाइड्रेट और ग्लोइंग बनती है। इससे चेहरे पर झुर्रियाँ भी नहीं पड़ती और यह पिंपल्स होने से भी रोकता है।

कम करें वजन- मीठा खाने से कैलोरी बढ़ती है जिससे वजन ज्यादा होने लगता है, लेकिन गुड़ में पाये जाने वाले मिनरल्स विशेषत पोटेशियम वजन को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। साथ ही यह मेटाबोलिज्म भी बढ़ाता है।

कब्ज- गुड़ पाचन का एक बहुत अच्छा साधन है। इससे पाचन तंत्रा दुरूस्त बना रहता है और कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं नहीं होती है। खाने के बाद गुड़ खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद रहता है।

घने बाल- गुड़ आयरन का एक अच्छा स्त्रोत है। इसे विटामिन सी से भरपुर चीजों जैसे नींबू, आँवला आदि के साथ खाने से बाल लंबे, घने, काले और हेल्दी बनते हैं। ऐसा माना जाता है कि महिने में दो बार शैंपू से पहले गुड़, मुल्तानी मिट्टी और दही का मिश्रण बालों में लगाने से बाल प्राकृतिक रूप से खूबसूरत और लंबे होते हैं।

लिवर की सफाई- गुड़ का एक छोटा सा टुकड़ा आपके शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर कर देता है। अगर कोई एल्कोहल का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करता है तो लिवर की सफाई के लिए गुड़ बेस्ट है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ खाकर आप ज्यादा एल्कोहल पी सकते हैं। एल्कोहल शरीर के लिए हानिकारक होता है।

जोड़ों के दर्द में सहायक- गुड़ में कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। गुड़ के सेवन से हड्डियों से जुड़ी समस्याओं और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। रोज अदरक के एक टुकड़े के साथ गुड़ खाने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है और ज्वॉइंट्स मजबूत बनते हैं।

अस्थमा में सहायक- गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट्स पाये जाने से यह गले और फेफड़ों के इंफेक्शन से बचाव करता है। साथ ही अस्थमा मरीज को साँस लेने में होने वाली दिक्कत को भी दूर करता है।

इम्यूनिटी- गुड़ में एंटिऑक्सीडेंट्स, जिंक, सेलेनियम पाया जाता है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, जिससे बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है इसलिए रोज एक छोटा सा गुड़ का टुकड़ा खाना चाहिये।

खून की सफाई- अगर रोजाना गुड़ खाया जाय तो यह खून को प्योरिफाई करता है। इससे खून साफ रहता है। गुड़ खाने से ब्लड हीमोग्लोबिन बढ़ता है और खून संबंधी कई बीमारियों की जोखिम कम होती है।

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

अनेक रोगों का मूल कारणः विरूद्ध आहार

  • जो पदार्थ रस-रक्तादि धातुओं के विरूद्ध गुण-धर्म वाले व वात-पित-कफ इन त्रिदोषों को प्रकुपित करने वाले हैं, उनके सेवन से रोगों की उत्पत्ति होती है। इन पदार्थों में कुछ परस्पर गुण विरुद्ध, कुछ संयोग विरूद्ध, कुछ संस्कार विरूद्ध और कुछ देश, काल, मात्रा स्वभाव आदि से विरूद्ध होते हैं। जैसे – दूध के साथ मूँग, उड़द, चना आदि सभी दालें, सभी प्रकार के खट्टे व मीठे फल, गाजर, शकरकंद, आलु, मूली जैसे कंदमूल, तेल, गुड़, शहद, दही, नारियल, लहसुन, कमलनाल, सभी नमकयुक्त व अम्लीय पदार्थ संयोग विरुद्ध हैं। दूध व इनका सेवन एक साथ नहीं करना चाहिये। इनके बीच कम-से-कम 2 घंटे का अंतर अवश्य रखें। ऐसे ही दही के साथ उड़द, गुड़, काली मिर्च, केला व शहद, शहद के साथ गुड़, घी के साथ तेल नहीं खाना चाहिये।
  • शहद, घी, तेल व पानी इन चार द्रव्यों में से दो अथवा तीन द्रव्यों को समभाग मिलाकर खाना हानिकारक है। गर्म व ठंडे पदार्थों को एक साथ खाने से जठराग्नि व पाचनक्रिया मंद हो जाती है। दही व शहद को गर्म करने से वे विकृत बन जाते हैं।
  • दूध को विकृत कर बनाया गया छेना, पनीर आदि व खमीरीयुक्त पदार्थ (जैसे – डोसा, इडली, खमण) स्वभाव से ही विरुद्ध हैं अर्थात् इनके सेवन से लाभ की जगह हानि ही होती है। रासायनिक खाद व इंजेक्शन द्वारा उगाये गये अनाज व सब्जियाँ तथा रसायनों द्वारा पकाये गये फल भी स्वभाव विरुद्ध हैं। हेमंत व शिशिर इन शीत ऋतुओं में ठंडे, रूखे-सूखे, वातवर्धक पदार्थों का सेवन, अल्प आहार तथा वसंत-ग्रीष्म-शरद इन उष्ण ऋतुओं में उष्ण पदार्थ व दही का सेवन काल विरुद्ध है। मरुभूमि में रूक्ष, उष्ण, तीक्ष्ण पदार्थों (अधिक मिर्च, गर्म मसाले आदि) व समुद्रतटीय प्रदेशों में चिकने ठंडे पदार्थों का सेवन, क्षारयुक्त भूमि के जल का सेवन देश विरुद्ध है।
  • अधिक परिश्रम करने वाले व्यक्तियों के लिए रूखे-सूखे, वातवर्धक पदार्थ व कम भोजन तथा बैठे-बैठे काम करने वाले व्यक्तियों के लिए चिकने, मीठे, कफवर्धक पदार्थ व अधिक भोजन अवस्था विरूद्ध है।
  • अधकच्चा, अधिक पका हुआ, जला हुआ, बार-बार गर्म किया गया, उच्च तापमान पर पकाया गया (जैसे – ओवन में बना व फास्टफूड), अति शीत तापमान में रखा गया (जैसे – फ्रिज में रखे पदार्थ) भोजन पाक विरूद्ध है।
  • मल-मूत्र का त्याग किये बिना, भूख के बिना अथवा बहुत अधिक भूख लगने पर भोजन करना क्रम विरुद्ध है।
  • जो आहार मनोनुकूल न हो वह हृदय विरुद्ध है क्योंकि अग्नि प्रदीप्त होने पर भी आहार मनोनुकूल न हो तो सम्यक् पाचन नहीं होता।
  • इस प्रकार के विरोधी आहार के सेवन से बल, बुद्धि, वीर्य व आयु का नाश, नपुंसकता, अंधत्व, पागलपन, भगंदर, त्वचाविकार, पेट के रोग, सूजन, बवासीर, अम्लपित्त (एसीडिटी), सफेद दाग, ज्ञानेन्द्रियों में विकृति व अष्टौमहागद अर्थात् आठ प्रकार की असाध्य व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। विरुद्ध अन्न का सेवन मृत्यु का भी कारण हो सकता है।
  • देश, काल, उम्र, प्रकृति, संस्कार, मात्रा आदि का विचार तथा पथ्य-अपथ्य का विवेक करके नित्य पथ्यकर पदार्थों का ही सेवन करें। अज्ञानवश विरुद्ध आहार के सेवन से हानि हो गयी तो वमन-विरेचनादि पंचकर्म से शरीर की शुद्धि एवं अन्य शास्त्रोक्त उपचार करने चाहिये। ऑपरेशन व अँग्रेजी दवायें रोगों को जड़-मूल से नहीं निकालते। अपना संयम और निःस्वार्थ एवं जानकार वैद्य की देख-रेख में किया गया पंचकर्म विशेष लाभ देता है। इससे रोग तो मिटते ही हैं, 10-15 वर्ष आयुष्य भी बढ़ सकता है।
  • खीर के साथ नमकवाला भोजन, खिचड़ी के साथ आइसक्रीम, मिल्कशेक – ये सब विरुद्ध आहार हैं। इनसे पाश्चात्य जगत के बाल, युवा, वृद्ध सभी बहुत सारी बीमारियों के शिकार बन रहे हैं। अतः खट्टे-खारे के साथ भूलकर भी दूध की चीज न खायें-न खिलायें।"
ऋतु परिवर्तन विशेष
  • शीत व उष्ण ऋतुओं के बीच में आऩे वाली वसंत ऋतु में न अति शीत, न अति उष्ण पदार्थों का सेवन करना चाहिये। सर्दियों के मेवे, पाक, दही, खजूर, नारियल, गुड़ आदि छोड़कर अब ज्वार की धानी, भुने चने, पुराने जौ, मूँग, तिल का तेल, परवल, सूरन, सहजन, सूआ, बथुआ, मेथी, कोमल बेंगन, ताजी नरम मूली तथा अदरक का सेवन करना चाहिये।
  • सुबह अनुकूल हो ऐसे किसी प्रकार का व्यायाम जरूर करें। वसंत में प्रकुपित होने वाला कफ इससे पिघलता है। प्राणायाम विशेषतः सूर्यभेदी प्राणायाम (बायाँ नथुना बंद करके दाहिने से गहरा श्वाँस लेकर एक मिनट रोक दें फिर बायें से छोड़ें) व सूर्यनमस्कार कफ के शमन का उत्तम उपाय है। इन दिनों दिन में सोना स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक है।
  • कफजन्य रोगों में कफ सुखाने के लिए दवाइयों का उपयोग न करें। खानपान में उचित परिवर्तन, प्राणायाम, उपवास, तुलसी पत्र व गोमूत्र के सेवन एवं सूर्यस्नान से कफ का शमन होता है।
  • जोड़ों के दर्द का अनुभूत प्रयोग
  • एक चम्मच पिसा हुआ मेथीदाना, आधा चम्मच हल्दी चूर्ण और आधा चम्मच पीपरामूल चूर्ण एक गिलास पानी में रात को भिगो दें। सुबह आधा गिलास बचने तक उबालें। गुनगुना होने पर छान के खाली पेट केवल पानी पी लें। दर्द खत्म होने तक ले सकते हैं। 20-30 दिन में लाभ महसूस होगा। दर्द अधिक हो तो ज्यादा दिन भी प्रयोग कर सकते हैं।

खाना खाते समय कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिये...

  • हमें दिन में सिर्फ सुबह और शाम, दो बार ही भोजन करना चाहिये। सुबह के समय और शाम के समय पाचन तंत्र बहुत अच्छी तरह भोजन पचाता है, क्योंकि सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक और सूर्यास्त से ढाई घंटे पहले तक जठराग्नि (भूख) पूरे प्रभाव में रहती है। शेष समय में यदि भूख लगे तो फलाहार या हल्का भोजन किया जा सकता है। हर रोज मौसमी फलों का भी सेवन अवश्य करना चाहिये। 
  • कभी भी एकदम भरपेट भोजन नहीं करना चाहिये। भूख से थोड़ा सा कम भोजन सेहत को फायदा पहुँचाता है। जो लोग भूख से थोड़ा कम खाना खाते हैं, वे सेहतमंद, दीर्घायु, बलवान, सुखी और सुन्दर शरीर प्राप्त करते हैं। ऐसे लोगों की संतान भी गुणवान होती है। जबकि जो लोग भूख अधिक भोजन करते हैं, वे आलसी प्रवृत्ति के हो जाते हैं और उन्हें कई प्रकार की बीमारियाँ होने की संभावनायें काफी अधिक होती हैं। 
  • मान्यता है कि हम जब भी खाना खायें तब हमारा मुँह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिये। भोजन करने के लिए ये दिशायें शुभ मानी गई हैं। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन नहीं करना चाहिये, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार ऐसे भोजन नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। यदि हम हमेशा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके ही भोजन करते हैं तो इससे शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो सकती है। 
  • पलंग पर बैठकर या खड़े होकर भोजन नहीं करना चाहिये। इस बात का भी ध्यान रखें कि टूटे-फूटे बर्तनों में भी भोजन नहीं करना चाहिये। इससे नकारात्मक ऊर्जा आती है। आलस्य बढ़ता है। 
  • कभी भी रात के समय ज्यादा भोजन नहीं करना चाहिये। साथ ही, यह भी ध्यान रखें कि खाना खाने के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिये। इससे पाचन तंत्र कमजोर होता है। 
  • कभी भी परोसे गए भोजन की निंदा नहीं करनी चाहिये। ऐसा करने पर भोजन का अपमान होता है और उससे हमें शारीरिक ऊर्जा प्राप्त नहीं हो पाती है। प्रसन्न मन से भोजन करना चाहिये। 
  • भोजन करने से पहले अन्न देवता और अन्नपूर्णा माता का ध्यान करना चाहिये। उन्हें नमन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिये। साथ ही, ऐसी प्रार्थना करें कि सभी भूखों को भी ईश्वर भोजन प्रदान करें। 
  • व्यक्ति को हमेशा शुद्ध मन और शुद्ध शरीर से भोजन बनाना चाहिये। यदि संभव हो तो भोजन बनाने से पहले देवी-देवताओं के मंत्रों का जप करना चाहिये। 
  • यदि कोई व्यक्ति सभी को बता-बताकर आपको खाना खिलाए तो ऐसा भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिये।
  • किसी कुत्ते के द्वारा खाना छू लिया गया हो तो ऐसा खाना न खायें । 
  • पुरानी परंपराओं के अनुसार कभी भी आधा खाया हुआ फल, मिठाईयाँ या शेष बचा हुआ भोजन बाद में पुन: नहीं खाना चाहिये। साथ ही, यह भी ध्यान रखें कि एक बार खाना छोड़कर उठ जाने पर पुन: भोजन नहीं करना चाहिये। 
  • भोजन के समय मौन रहना चाहिये। खाते समय बातचीत करने से पाचन ठीक से नहीं हो पाता है। 
  • भोजन को बहुत चबा-चबाकर खाना चाहिये। एक पुरानी कहावत है- खाने को पीना चाहिये और पानी को खाना चाहिये। इसका अर्थ यह है- खाने को इतना चबायें कि वह पानी की तरह बन जायें और भोजन के बीच में कम से कम पानी पीना चाहिये। 
  • यदि किसी परिस्थिति में खाना खाने से आपका अनादर हो रहा हो तो वह भोजन भी न खायें । 
  • यदि अवहेलना पूर्ण व्यवहार के साथ भोजन परोसा गया हो तो वह भी नहीं खाना चाहिये। 
  • खाना खाने से पहले हमें अपने पाँच प्रमुख अंगों (दोनों हाथ, दोनों पैर और मुख) को अच्छी तरह धो लेना चाहिये। इसके बाद भी भोजन करना चाहिये। 
  • 1आमतौर पर किसी भी गृहस्थ व्यक्ति को एक समय में 320 ग्राम से ज्यादा भोजन नहीं करना चाहिये। 
  • भोजन करते समय सबसे पहले रसदार भोजन करें। इसके बाद गरिष्ठ भोजन करें और अंत में तरल पदार्थ ग्रहण करना श्रेष्ठ रहता है। 
  • भोजन बनाते समय सबसे पहले 3 रोटियाँ अलग निकाल लें। इन रोटियों में से एक रोटी गाय को, एक रोटी कुत्ते को और एक रोटी कौए को दें। भोजन ग्रहण करने से पहले अग्नि देव और अन्य देवी-देवताओं को भी भोग लगाना चाहिये। 
  • यदि आप चाहते हैं कि आप जो भी खायें वह तुरंत पच जाए तो इन भावों के साथ कभी भी भोजन न करें। ये भाव हैं ईर्ष्या भाव, भय, क्रोध, लोभ, दीन भाव, द्वेष भाव आदि। इन भावों के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है।

भोजन करने के भी होते हैं कुछ

सबसे प्रमुख बात जो सदैव याद रखनी चाहिये कि भोजन तभी खाना चाहिये जब हमें भूख लगी हो। ऐसा तभी होता है जब पूर्व में किया गया भोजन ठीक से पच जाता है। भोजन पूरी तरह से पच चुका है, इसे निम्न लक्षणों से जानना चाहिये-
1. शरीर में हल्कापन हो।
2. गैस पास हो गई हो।
3. शुद्ध डकार आए।
4. मल व मूत्र सही तरह से निवृत्त हो।
  • खाना कभी भी आवश्यकता से अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिये। खाने की मात्रा का निर्धारण प्रत्येक व्यक्ति की अपनी पाचन शक्ति पर निर्भर करता है। वह मात्रा जो 6-8 घंटे में ठीक तरह से पच जाती हो तथा जिसको खाने के पश्चात सही समय पर सम्यक पाचन के सभी लक्षण दिखाई दे जाते हों तो यही मात्रा उस व्यक्ति के लिए उचित मात्रा मानी जा सकती है।
  • खाना हमेशा प्रसन्नाचित और मन लगाकर खाना चाहिये। तभी यह शरीर व मन को प्रसन्नाता देता है। बातचीत करते व हँसते हुए खाना नहीं खाना चाहिये। यदि आप भावनात्मक रूप से खिन्न है तो इस स्थिति में भी खाना नहीं खाना चाहिये जैसे - क्रोध, दुख आदि। इस स्थिति में खाना खाने से वह ठीक से पचता नहीं है। खाना सदैव बैठकर ही खाना चाहिये, खड़े होकर खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। खाना एकांत व स्वच्छ जगह ही खाना चाहिये।
  • खाना सदैव ताजा बना हुआ, हल्का व सुपाच्य ही खाना चाहिये। बासी खाना पाचक अग्नि को मंद करता है। फ्रिज में रखा खाना भी बार-बार गरम करके खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसान देय है।
  • खाना हल्का गर्म ही खाना चाहिये, इससे पाचक अग्नि तीव्र होती है तथा खाने में रुचि बढ़ती है। खाने में अधिक तैल व मसालों का प्रयोग नहीं करना चाहिये। खाना न अत्यंत धीमें ना अधिक जल्दी-जल्दी खाना चाहिये। खाने में 6 रसों का प्रयोग रहना चाहिये मधुर, नमकीन, अम्ल, कटु, तिक्त, कषाय खाने का प्रारंभ मधुर रस से करना चाहिये। खाने में न अधिक रुक्ष (सुखे पदार्थो) नहीं अधिक चिकनाई वाले पदार्थ होने चाहिये।
  • सप्ताह में एक दिन उपवास अवश्य रखना चाहिये। जिससे पाचन तंत्र की शुद्धि होती है। उपवास के समय केवल फलाहार या दुग्धाहार ही लेना चाहिये। लेकिन यह ध्यान रहे कि ज्यादा उपवास रखने या भूखे रहने से भी स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है- जैसे कमजोरी, थकान, हाथ-पैर ढीले पड़ना, खट्टी डकारें, खाने में अरुचि, भूख न लगना एवं निम्न रक्तचाप आदि।
  • खाने के साथ बीच-बीच में पानी पीना लाभप्रद होता है। जबकि खाने के पहले पानी पीने से शरीर भार में कभी तथा बाद में एक साथ पीने से शरीर भार बढ़ता है। खाने में निम्न संयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है। इन्हें विरोधी आहार कहते है। जैसे दूध के साथ खट्टी चीजें जैसे आम व दूध। गर्म खाने के साथ ठंडा पानी। गर्म करके दही खाना आदि। सामान्यत: रात्रि में दही नहीं खाना चाहिये।
  • खाने में सेंधा नमक का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है। लाल मिर्च के स्थान पर काली मिर्च का प्रयोग करना चाहिये। रात्रि का भोजन जल्दी कर लेना चाहिये। खाना खाने के ठीक बाद सोने से पाचन ठीक तरह से नहीं होता दिन में बार-बार न खाकर निश्चित अंतराल के बाद भोजन करना चाहिये।
इस प्रकार भोजन से संबंधित इन छोटे-छोटे नियमों को यदि ध्यान में रखें तो आप न केवल शारीरिक अपितु मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे, क्योंकि कहा है, 'जान है तो जहान है'।

थोड़ी सी सावधानी और आपकी सेहत

  • भोजन के साथ फलों का रस लेना हानिकारक होता है।
  • घी, शहद बराबर मात्रा में नहीं लेना चाहिए। बराबर मात्रा में यह जहर हो जाता है।
  • शहद का प्रयोग गर्म करके नहीं करें। गर्म शहद का प्रयोग करने से आपको अनेक रोग लग जायेंगे। किसी भी गर्म पदार्थ के साथ शहद का प्रयोग करें। मूली के साथ शहद का सेवन हानिकारक है। काँसे के बर्तन में घी दो दिन से ज्यादा रखें। दो दिन से अधिक रखे होने पर घी का प्रयोग करने से वह भी भारी होगा।
  • दूध के साथ नमकीन खाने से त्वचा पर छोटे-छोटे सफेद दाने निकल आते हैं। कटहल के खाने के बाद तुरंत दूध पीयें। इन्फेक्शन होने की संभावना नहीं रहेगी। दूध पीने के बाद दही नहीं खाना चाहिए। पीतल के बर्तन में दूध या दही रखने में खूद हरा पड़ जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। दूध के साथ मांस मछली का सेवन करना भी स्वास्थ्य उपयोगी नहीं। दूध पीने के बाद किसी भी खट्टे पदार्थ का सेवन करें।
  • दही खरबूजा गर्म खाने के साथ नहीं खाना चाहिए। लस्सी, केला खाने के बाद पियें। दूध के साथ कोई फल लें। दूध, मछली, शहद साथ प्रयोग करने कोढ़ होने की संभावना रहती है। चर्बी वाले पदार्थों के साथ शहद का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • एल्यूमीनियम के बर्तन में हरी पत्तेदार सब्जी नहीं बनानी चाहिए। अगर एल्यूमीनियम के बर्तन में हरी सब्जी बनायेंगे तो उसमें एल्यूमीनियम का अंश का जायेगा। दूध भी एल्यूमीनियम के बर्तन में उबालें। दूध में एल्यूमीनियम का अंश होने की संभावना रहती है।
  • नींबू लहसुन एक साथ प्रयोग करें। चावल का माढ़ या पानी निकालें। माढ़ में ही सारे विटामिन होते हैं। अँग्रेजी दवाई खाली पेट लें। तली चीज खाने के तुरंत बाद पानी पियें। भोजन में खाने वाला सोडा डालकर प्रयोग करने से भोजन में विटामिनसीकी मात्रा नष्ट हो जाती है।
  • खाने के तुरंत बाद व्यायाम करें। तरबूज खरबूजा इत्यादि खाने के बाद उसे फेंक दें। दुबारा उसका प्रयोग करें। चाय बनाकर तुरंत प्रयोग में लें। आधा घण्टे पहले रखी हुई चाय का प्रयोग सेहत के लिए हानिकारक है। कटी हुई प्याज का प्रयोग भी तुरंत कर लें। कटी हुई प्याज कुछ घण्टे रखे होने पर प्रयोग करें।

भारतीय गणना

आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!