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शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

अलहोरना

अलहोरना1— स.क्रि. 1.मूल्यवान या अच्छी चीजों को निकालना, छाँटना। 2.मुनाफा कमाना। 3.चुनना। 

अलहोरना2— स.क्रि. अनाज आदि से अलाभदायक या व्यर्थ चीजों को निकालना।

अलहन

अलहन— सं. 1.वह कार्य जो रोकने पर भी प्रहार या नाश कर दे, हादसा, घटना, दुर्घटना। 2.संकट, विपत्ति।

अलसाना

अलसाना— अ.क्रि. आलस्य आना या लगना, शिथिलता का अनुभव करना।

अलवारना

अलवारना— स.क्रि.दे. ‘अलहोरना’।

अलस

अलस— सं. आलस्य।

अलवान

अलवान— सं. ऊनी चादर, कंबल।

अलवा-जलवा

अलवा-जलवा1— वि. (विकल्प बोधक अवयव+अ.जल्वः=शोभा) 1.जो शोभा के लिए विकल्प के योग्य हो, निम्न कोटी का। 2.साधारण। 3.ऐसा-वैसा, सस्ता।

अलवा-जलवा2— वि. 1.स्वादहीन और जला हुआ। 2.काम चलाऊ।

अलवइन

अलवइन— वि. रोकने या मना करने पर भी हिलते-डुलते रहने वाला, शरारती, शैतान, उद्दंड।

अलमस्त

अलमस्त— वि. अपने आप में मस्त रहने वाला।

अलमारी

अलमारी— सं. वह बड़ा संदुक जिसमें सामान रखने के लिए खाने बने रहते हैं।

अलम-ठलम

अलम-ठलम— सं. कार्य के दुख से व्यर्थ समय खोने की क्रिया या भाव।

अलबेला

अलबेला— वि.पु. (स्त्री.अलबेलिन(ली) 1.मन को भाने वाला, सुंदर। 2.बनाठना। 3.बाँका, मनमौजी। 4.अनोखा, अनूठा।

अलपकाल

अलपकाल— सं. थोड़ा समय, अल्पकाल।

अलप

अलप— वि. थोड़ा, कम, जैसे ‘अलपकाल के बिहाव लउहत-तउहत ताय’।

अलथी-पलथी

अलथी-पलथी— सं. उलट-पुलट, छटपटाहट, करवट।

अलथी-कलथी

अलथी-कलथी— सं.दे. ‘अलथी-पलथी’।

अलगोजवा

अलगोजवा— सं. बीन के जैसा एक वाद्य, दुहरी बाँसुरी वाला एक वाद्य।

अलगियाना

अलगियाना— अ.क्रि. 1.अलग होना। 2.दूर हट जाना। 3.निकल जाना। 

स.क्रि. 1.पृथक करना। 2.छाँटना। 3.दूर करना। 4.हटाना। 5.निकालना।

अलगा

अलगा— सं. 1.वह जिससे पैरों की रक्षा की जाती है, जूता, चप्पल। 2.साड़ी का वह भाग जो कंधे से पीछे की ओर लटकता है।

अलगाना

अलगाना— अ.क्रि. 1.अलग होना, पृथक होना। 2.दूर हट जाना। 3.निकल जाना। 

स.क्रि. 1.पृथक करना, छाँटना, दूर करना, हटाना। 2.निकालना।

भारतीय गणना

आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!