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रविवार, 6 नवंबर 2016

जंगली प्याज़ : कमर और घुटनों के दर्द के लिये रामबाण इलाज

एक ज़माना था जब अपने आपको नपुंसक अनुभव करने वालो को जमकर लूटा जाता था हर जगह। “नाकाम मर्द निराश ना हों” के विज्ञापन देखने को मिल जाते थे ट्रेन में सफ़र करते हुये शहर आने से पहले ना जाने कितने हकीम, वैद्य और डॉक्टरों के विज्ञापन नपुंसक लोगों को महामर्द बनाने का दावा करते हुये दिखाई दे जाते थे। समय बदला अब लोगों से टी.वी. के विज्ञापनों के द्वारा उगाही शुरू हो गई। इस समय अधिकाँश शातिर लोगों के निशाने पर गंजेपन, घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोग आ गये हैं। इसमें मुझे गंजे लोगों को लूटने वालों पर बहुत गुस्सा आता है क्योंकि एक गंजा इंसान बहुत निरीह और मासूम होता है। उसकी बेचारगी की इन्तेहा देखिये कई बार ठगे जाने के बाद भी वह गंजापन दूर करने वाले नये दावेदार के झाँसे में आ ही जाता है।

बहरहाल आज लेख लिखने का मेरा उद्देश्य घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोगों को व्यर्थ के खर्चे से बचाना है। इन दिनों अन्नू कपूर अस्थिजीवक नाम की दवा का भेराभूत विज्ञापन कर रहे हैं। जब भी टी.वी. खोलो ये महाशय बड़े अपनेपन के साथ पूरे देश के घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोगों कों दर्द से राहत दिलाने के दावे करते नज़र आ जाते हैं।
निश्चित रूप से आयुर्वेद में कई औषधियाँ बेमिसाल हैं लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि लोगों की जेब तराशी की जाये। जो लोग ढाई हज़ार की अस्थिजीवक दवा मंगा चुके हैं उन्हें कितना लाभ हुआ होगा यह तो मैं नहीं जानता, लेकिन मैं आपको एक रामबाण दर्द निवारक दवा के बारे में बताता हूँ।

प्याज जैसी दिखने वाली यह “जंगली प्याज” (indian squill) इन दिनों जंगलों में भरपूर मात्रा में ऊग रही है जहाँ हम लोगों ने वृक्षारोपण किया हुआ है वहाँ यह प्रचुर मात्रा में ऊग रही है। आपको सिर्फ इतना करना है कि इसे प्याज की तरह क़तर कर शुद्ध सरसों के तेल में तब तक तलना (फ्राय करना ) है जब तक वो काली ना पड़ जाय। (दौ सौ ग्राम तेल में जंगली प्याज की दो गाँठें)।
फिर उस तेल को कपड़े से छानकर एक बोतल में सहेज कर रख लीजिये और रोज दो बार घुटनों की मालिश कीजिये दर्द ऐसे खत्म हो जायेगा जैसे कभी था ही नहीं, यह घुटने के दर्द के लिये रामबाण है और लगभग मुफ्त है। चूँकि हम प्रतिदिन यहाँ पौधों पक्षियों की सेवा करते हैं इसलिये घास के बीच इस कंद को पहचान जाते हैं। एक अनजान व्यक्ति के लिये यह कठिन होगा इसलिये फोटो संलग्न है। घास के बीच में लम्बी पत्तियों वाली वनस्पति जंगली प्याज है।


ध्यान रहे इसे खाने का प्रयास ना करें यह जहरीली होती है।
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– अजित भोंसले

मंगलवार, 19 जुलाई 2016

अलसी से पाइये सम्पूर्ण पोषण

क्या आप अलसी के बारे में नहीं जानते तो जान लीजिये, क्योंकि ये गुणों की खान है। अलसी (Alsi or Flax Seeds)  तिल के बीज से थोड़े बड़े आकार में होती है। खाने में इसका प्रयोग बेक की जाने वाली रेसिपी पर छिड़क कर या इसे पीस कर लड्डूओं या कुकीज़, केक आदि में प्रयोग किया जाता है। यदि आप बिना अंडे के केक आदि बनाना चाहते हैं तो अंडे के विकल्प के रूप में भी अलसी के पिसे हुए चूरे को या अलसी के बीज को भिगो कर पीसकर प्रयोग कर सकते हैं।

इसमें प्रोटीन, फाइबर, लिग्नन, ओमेगा-3 फेटी एसिड, विटामिन-बी ग्रुप, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक, सेलेनियम आदि तत्व होते हैं। अश्वगंधा व हरी सब्जियों में पाया जाने वाला विटामिन नियासीन भी अलसी में प्रचुरता से होता है।


अलसी रक्तचाप को संतुलित रखती है, कॉलेस्ट्रॉल (LDL-Cholesterol)  की मात्रा को कम करती है, दिल की धमनियों में खून के थक्के बनने से रोकती है, हृदयघात व स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव करती है, हृदय की गति को नियंत्रित रखती है और वेन्ट्रीकुलर एरिदमिया से होने वाली मृत्युदर को बहुत कम करती है। यह कब्ज और बबासीर के लिये बहुत कारगर है।

अलसी के एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं जिससे त्वचा आकर्षक, कोमल, नम व बेदाग रहती है। यह स्वस्थ त्वचा जड़ों को भरपूर पोषण दे कर बालों को भी स्वस्थ, चमकदार व मजबूत बनाती है।

अलसी के बीज के चमत्कारों का हाल ही में खुलासा हुआ है कि इनमें 27 प्रकार के कैंसररोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाये जाने वाले ये तत्व कैंसररोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम में अलसी का सेवन कारगर है। दूसरा महत्वपूर्ण खुलासा यह है कि अलसी के बीज सेवन से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा तीव्रतर होती है।

कैसे खायें अलसी के बीज
अलसी को धीमी आँच पर हल्का भून ले्ं। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख ले्ं। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ ले्ं। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिये, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिये थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखे्ं। अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए्। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा माँगता है।

एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आँच पर पकायें जब तक कि यह पानी आधा न रह जाये। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करे्ं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा आदि के उपचार में उपयोगी है।

अलसी के बीज के चूरे को रोटी, दूध, दाल या सब्जी की ग्रेवी में मिलाकर खाया जा सकता है। प्रति व्यक्ति पाँच ग्राम से दस ग्राम तक अलसी का खाना स्वास्थ्य के लिये गुणकारी रहता है।

अलसी को नमक लगे पानी में भिगो कर फिर सूखाकर सेक लें, फिर इसे खाना खाने के बाद मुखवास के तौर पर भी खाया जा सकता है।
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विशेष : अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एसिड थायरायड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने में आवश्यक भूमिका निभाता है। हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को अलसी और अलसी के तेल का प्रयोग जरूर करना चाहिये।
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गर्मी में आप इसकी मात्रा आधी कर लें। 

मंगलवार, 28 जून 2016

बिच्छु काटने पर तुरंत आराम के लिए 4 रामबाण उपाय

गाँवों या शहरों में अक्सर कच्ची जगह या बरसात में घर में बिच्छू निकल आते हैं, अगर ये काट ले तो भयंकर पीड़ा होती है, और इनके ज़हर चढ़ने का भी खतरा रहता है, ऐसे में ये रामबाण उपाय सिर्फ 2 मिनट में ज़हर को उतार देगा और दर्द शांत कर देगा...! आइये जाने इस रामबाण उपचार को-

1. बिच्छू के काटने पर रामबाण फिटकरी का प्रयोग
  • फिटकरी को किसी साफ़ किये हुए पत्थर पर, थोड़ा सा पानी डालकर चंदन की तरह घिसें... फिर जहाँ पर बिच्छु ने काटा हो वहाँ पर इस फिटकरी का लेप लगाकर, आग से थोड़ा सेंकें। कैसा भी जहरीला बिच्छु का काटा क्यों न हो, इस फिटकरी के प्रयोग से जहर सिर्फ दो ही मिनट में उतर जाता है।
  • फिटकरी को चिमटी से पकड़ कर थोडा गर्म कर लीजिये, जैसे ही फिटकरी पिघलने लगे तो फिटकरी को बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लगा दीजिये, फिटकरी तुरंत वहाँ चिपक जायेगी, और पूरा ज़हर चूसकर अपने आप उतर जायेगी।


2. बिच्छु काटने पर इमली का बीज
इमली के बीज को साफ़ पत्थर पर घिंसें, घिसते-घिसते अन्दर का सफ़ेद भाग निकल आयेगा तो उसे भी बिच्छु के काटने के स्थान पर लगा देंगे तो यह चिपक जायेगा, जैसे ही नीचे गिरे तो दूसरा बीज घिसकर लगाइये... इस प्रकार बिच्छु का ज़हर उतर जाता है।


3. बिच्छु काटने पर माचिस का मसाला
बिच्छु के डंक मारने पर माचिस की 5-6 तीलियों के मसाले को निकालकर पानी में घोलकरर बिच्छु के डंक लगे स्थान पर लगाने से तत्काल बिच्छु का जहर उतर जाता है। इससे मधुमक्खी व बर्रे के काटने पर लगाने से भी जहर नहीं फैलता और तुरन्त आराम मिलता है।


4. बिच्छू काटने पर सेंधा नमक
बिच्छू के डंक मार जाने पर अगर ज़हर का स्थान ना मिले तो ऐसे में ये उपाय बेहद लाभकारी है। लाहोरी (सेंधा नमक) पंद्रह ग्राम और साफ़ पानी 75 ग्राम आपस में मिलकर साफ़ शीशी में भर कर रखे लें... बस दवा तैयार है... बिच्छु काटने पर आँखों में सलाई (सुरमा लगाने वाली) की सहायता से आँखों में एक एक बूँद डाल दीजिये, कुछ ही मिनटों में ज़हर उतर जायेगा... ये प्रयोग अन्य प्रयोगों के साथ भी किया जा सकता है।

बिच्छु काटने पर विशेष

1. उग्र विष वाले बिच्छु जिसकी दुम धरती पर घिसटती चलती है, के काटने पर, अगर किसी ऐसी जगह काटा हो जहाँ पटी बांध सकें तो बांध दें जैसे की हाथ, पैर या जाँघ पर, जहाँ काटा गया हो वहाँ से चार ऊँगली ऊपर बाँध देना चाहिये फिर उसके चार ऊँगली ऊपर फिर से बाँध दें। ऐसा करने से विष पूरे शरीर में नहीं फैलेगा।

2.यदि डंक दंश स्थान में रह गया हो तो किसी सेफ्टीपिन या चिमटी को आग की लौ में गर्म करने के बाद त्वचा में घुसे हुए डंक को उसकी सहायता से निकाल देना चाहिए और बिना समय नष्ट करें उपरोक्त उपचारों में से एक उपचार कर लेना चाहिये।

3. बारीक़ पिसा हुआ सेंधा नमक को प्याज के टुकड़े से उठाकर दंश-स्थान पर मले, इससे जहर और डंक दोनों दूर होंगे।

रविवार, 13 मार्च 2016

सेहत के दोहे-90

हृदय रोग सेआपको, बचनाहै श्रीमान

सुरा, चाय याकोल्ड्रिंक, का मत करिये पान।।

सेहत के दोहे-88

जब भी लघुशंका करें, खड़े रहेयदि यार।

इससे हड्डी रीढ़की, होतीहै बेकार।।

सेहत के दोहे-89

सीतल, गर्म जलसे कभी, करिये मतस्नान।

घट जाता हैआत्मबल, नैननको नुकसान।।

सेहत के दोहे-87

मूली खाओ हरदिवस, करेरोग कानाश।

गैस और पाईल्सका, मिटजाये संत्रास।।

सेहत के दोहे-86

सौ वर्षों तकवह जिये, लेत नाकसे सांस।

अल्पकाल जीवें करें, मुँह सेश्वांसोच्छ्वास।।

सेहत के दोहे-85

चैत्र माह मेंनीम की, पत्ती हरदिन खाव।

ज्वर, डेंगू यामलेरिया, बारहमील भगाव।।

सेहत के दोहे-84

हृदय रोग, खॉंसीऔर आँवकरें बदनाम।

दो अनार खायेंसदा, बनेंगेबिगड़े काम।।

सेहत के दोहे-83

लौकी का रसपीजिये, चोकरयुक्त पिसान।

तुलसी, गुड़, सेंधानमक, हृदयरोग निदान।।

सेहत के दोहे-82

भोजन करके खाइये, सौंफ, गुड़और पान।

पत्थर भी पचजायगा, जानैसकल जहान।।

सेहत के दोहे-81

रोज मुलहठी चूसिये, कफ बाहर जाय।

बने सुरीला कंठभी, सबकोलगय सुहाय।।

सेहत के दोहे-80

दूषित पानी जोपिये, बिगड़ेउसका पेट।

ऐसे जल कोसमझिये, सौरोगों कागेट।।

सेहत के दोहे-79

नींबू पानी कासदा, करताजो उपयोग।

पास नहीं आतेकभी, यकृति-आंत केरोग।।

सेहत के दोहे-78

चोकर खाने सेसदा, बढ़तीतन कीशक्ति।

गेहूँ मोटा पीसिये, दिल मेंबढ़े विरक्ति।।

सेहत के दोहे-76

जो जस्ता केपात्र का, करता हैउपयोग।

आमंत्रित करता सदावह अड़तालीसरोग।।

सेहत के दोहे-77

फल या मीठाखाइके, तुरत पीजैनीर।

ये सब छोटीआंत में, बनते विषधरतीर।।

सेहत के दोहे-75

तेल वनस्पति खाइके, चर्बी लियोबढ़ाई।

घेरा कोलस्ट्राल तो, आज रहेचिल्लाई।।

सेहत के दोहे-74

मैदे से बिस्कुटबने, रोकेहर उत्कर्ष।

इसे खावेंरोक जो, हुये चौदह वर्ष।।

भारतीय गणना

आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!