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रविवार, 6 नवंबर 2016

जंगली प्याज़ : कमर और घुटनों के दर्द के लिये रामबाण इलाज

एक ज़माना था जब अपने आपको नपुंसक अनुभव करने वालो को जमकर लूटा जाता था हर जगह। “नाकाम मर्द निराश ना हों” के विज्ञापन देखने को मिल जाते थे ट्रेन में सफ़र करते हुये शहर आने से पहले ना जाने कितने हकीम, वैद्य और डॉक्टरों के विज्ञापन नपुंसक लोगों को महामर्द बनाने का दावा करते हुये दिखाई दे जाते थे। समय बदला अब लोगों से टी.वी. के विज्ञापनों के द्वारा उगाही शुरू हो गई। इस समय अधिकाँश शातिर लोगों के निशाने पर गंजेपन, घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोग आ गये हैं। इसमें मुझे गंजे लोगों को लूटने वालों पर बहुत गुस्सा आता है क्योंकि एक गंजा इंसान बहुत निरीह और मासूम होता है। उसकी बेचारगी की इन्तेहा देखिये कई बार ठगे जाने के बाद भी वह गंजापन दूर करने वाले नये दावेदार के झाँसे में आ ही जाता है।

बहरहाल आज लेख लिखने का मेरा उद्देश्य घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोगों को व्यर्थ के खर्चे से बचाना है। इन दिनों अन्नू कपूर अस्थिजीवक नाम की दवा का भेराभूत विज्ञापन कर रहे हैं। जब भी टी.वी. खोलो ये महाशय बड़े अपनेपन के साथ पूरे देश के घुटने और कमर दर्द से पीड़ित लोगों कों दर्द से राहत दिलाने के दावे करते नज़र आ जाते हैं।
निश्चित रूप से आयुर्वेद में कई औषधियाँ बेमिसाल हैं लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि लोगों की जेब तराशी की जाये। जो लोग ढाई हज़ार की अस्थिजीवक दवा मंगा चुके हैं उन्हें कितना लाभ हुआ होगा यह तो मैं नहीं जानता, लेकिन मैं आपको एक रामबाण दर्द निवारक दवा के बारे में बताता हूँ।

प्याज जैसी दिखने वाली यह “जंगली प्याज” (indian squill) इन दिनों जंगलों में भरपूर मात्रा में ऊग रही है जहाँ हम लोगों ने वृक्षारोपण किया हुआ है वहाँ यह प्रचुर मात्रा में ऊग रही है। आपको सिर्फ इतना करना है कि इसे प्याज की तरह क़तर कर शुद्ध सरसों के तेल में तब तक तलना (फ्राय करना ) है जब तक वो काली ना पड़ जाय। (दौ सौ ग्राम तेल में जंगली प्याज की दो गाँठें)।
फिर उस तेल को कपड़े से छानकर एक बोतल में सहेज कर रख लीजिये और रोज दो बार घुटनों की मालिश कीजिये दर्द ऐसे खत्म हो जायेगा जैसे कभी था ही नहीं, यह घुटने के दर्द के लिये रामबाण है और लगभग मुफ्त है। चूँकि हम प्रतिदिन यहाँ पौधों पक्षियों की सेवा करते हैं इसलिये घास के बीच इस कंद को पहचान जाते हैं। एक अनजान व्यक्ति के लिये यह कठिन होगा इसलिये फोटो संलग्न है। घास के बीच में लम्बी पत्तियों वाली वनस्पति जंगली प्याज है।


ध्यान रहे इसे खाने का प्रयास ना करें यह जहरीली होती है।
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– अजित भोंसले

रविवार, 14 अगस्त 2016

मोबाइल फ़ोन इंटरनेट यूजर्स के लिये

 यदि आपके मोबाइल फ़ोन का इंटरनेट पैक खत्म हो जाता है और mobile data ऑन है तो कंपनी द्वारा पैसे main balance से काट लिये जाते हैं। किसी-किसी का तो पूरा balance ही खत्म हो जाता है यदि धोखे से रात भर डाटा ऑन रह गया हो।
उपरोक्त समस्यायों को देखते हुये ट्राई ने सभी मोबाइल ऑपरेटर्स को सख्त आदेश दिया है कि -

मैसेज बॉक्स में जाकर STOP लिखे और 1925 में भेज दे मेन बैलेंस से राशि कभी नहीं काटी जायेगी, सिर्फ नेट पैक रहेगा या जब नेट पैक करवायेंगे तभी इन्टरनेट काम करेगा। हाँ , यदि आपको कभी कोई इमरजेंसी में नेट यूज़ करना हो और नेट पैक नहीं है अथवा खत्म हो गया हो तो START लिखकर 1925 पर भेजें तो ही main balance से राशि काटी जायेगी। इस जानकारी को अक्सर मोबाइल ऑपरेटर कंपनी ग्राहक से छिपाते हैं यदि आप जान गये या पहले से जानते हैं फिर भी शेयर करें...

एक जरुरी हक़ जिसके बारे में आपको शायद पता ही नहीं

आपके एटीएम पर भी है दुर्घटना बीमा
क्या आप जानते हैं कि शहर से लेकर गाँवों तक बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो एटीएम का इस्तेमाल ना करते हों, लेकिन बड़ी संख्या में लोग एटीएम के दुर्घटना स्कीम के बारे में नहीं जानते। आजकल ज्यादातर लोग एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं लेकिन एटीएम का एक और फायदा है जो आपको पता ही नहीं है और वो जानकारी आपके बेहद काम की है

यदि किसी भी सरकारी या गैर सरकारी बैंक का एटीएम आपके पास है तो आपका उस बैंक में अपने आप ही दुर्घटना बीमा हो गया है। ये बीमा 25,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का होता है। इस योजना को शुरु हुये कई साल हो गये हैं, लेकिन 90-95 फीसदी लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं है क्योंकि बैंक कभी खुद ये जानकारी ग्राहकों को नहीं देते।



दुर्घटना बीमा की ये प्रक्रिया क्या है और मुआवजा कैसे मिलता है वो जान लीजिये..?
स्कीम के मुताबिक अगर किसी एटीएम धारक की दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसके परिवार के सदस्य को 2 महीने से लेकर 5 महीने के भीतर बैंक की उस ब्रांच में जाना होगा जहाँ उस शख्स का खाता था और वहाँ पर मुआवजे को लेकर एक एप्लीकेशन देनी होगी। अगर आपके पास किसी एक बैंक में एक ही अकाउंट हो या फिर उस बैंक की दूसरी ब्राँच में भी अकाउंट हो तो भी मुआवजा आपको किसी एक एटीएम पर ही मिलेगा जिससे पैसे का लेन-देन किया जा रहा हो। मुआवजा देने के पहले बैंक ये देखेंगे कि मौत से पहले पिछले 45 दिन के भीतर उस एटीएम से किसी तरह का वित्तीय लेन-देन हुआ था या नहीं।
बैंक में अकाउंट खुलने के बाद जैसे ही एटीएम आपको मिलता है बीमा पॉलिसी लागू हो जाती है। बैंक की तरफ से बीमा करवाया जाता है जिससे एटीएम धारक की मौत होने के बाद परिवार को मदद मिल सके।
इस स्कीम के मुताबिक आंशिक विकलाँगता से लेकर मृत्यु होने तक अलग अलग तरह के मुआवजे का प्रावधान दिया गया है। इसके लिये एटीएम धारक को कोई पैसा भी जमा नहीं करना होता, यदि आपके पास एटीएम है तो उस बैंक में ऑटोमैटिक दुर्घटना बीमा का फायदा आपको मिल सकता है। नियम ये है कि अगर एटीएम धारक की किसी दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसके घरवालों को उस बैंक से मुआवजा मिलेगा। ये योजना बैंक के ग्राहकों के लिये ही होती है लेकिन बैंक कभी भी इस बात की जानकारी ग्राहक को नहीं देते।

जानें किस स्थिति में कितना मिल सकता है मुआवजा
अगर आपके पास साधारण एटीएम है तो 1 लाख रुपये तक का मुआवजा परिवार वालों को मिलेगा और अगर कार्ड मास्टरकार्ड है तो ये मुआवजा 2 लाख रुपये तक हो सकता है। आंशिक विकलाँगता की सूची में अगर एक हाथ या एक पैर खराब होता है तो बैंक से 50,000 रुपये का मुआवजा मिल सकता है। वहीं दोनों हाथ या दोनों पैर खराब होने की सूरत में भी 1 लाख रुपये का मुआवजा एटीएम धारक को मिल सकता है।

अलग-एलग एटीएम टाइप पर अलग-अलग बीमा राशि
मास्टर कार्ड धारक को 50 हजार रुपये का बीमा और क्लासिक एटीएम पर 1 लाख रुपये तक का बीमा होता है। सभी वीजा कार्ड पर 2 लाख रुपये का बीमा और मास्टर मित्र कार्ड पर 25 हजार रुपये का बीमा होता है। वहीं प्लैटिनम कार्ड पर 2 लाख रुपये और मास्टर प्लैटिनम कार्ड पर 5 लाख रुपये तक का बीमा आपको बैंक से मिल सकता है।
मतलब ये कि अगर आपके पास प्लेटिनम कार्ड है जो आपके कार्ड पर 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा का प्रावधान है। अगर आपके पास क्लासिक कार्ड या फिर किसान डेबिट कार्ड है तो उस पर 50 हजार रुपये की राशि तय की गई है पीएनबी मित्र एटीएम कार्ड पर 25 हजार रुपये का दुर्घटना बीमा होता है। जबकि मास्टर रक्षक प्लेटिनम कार्ड पर 5 लाख रुपये का बीमा राशि तय की गई है।

जानें अपने हक को
आपके लिये सलाह यही है कि बैंक में अपने एटीएम के बारे में पूछताछ करें और इस बात की जानकारी माँगें कि आपके एटीएम कार्ड पर आपको कितना बीमा मिला है। बैंक अगर इंकार करे तो उसे बतायें कि आपको सरकार द्वारा इस योजना की पूरी जानकारी है। अगर दुर्घटना या एटीएम धारक की मृत्यु हो जाती है तो कार्ड टाइप के अनुसार मिलने वाली बीमा राशि की माँग करें और अगर बैंक इंकार करता है तो कंज्यूमर फोरम में जाकर अपना हक ले सकते हैं।

मंगलवार, 19 जुलाई 2016

अलसी से पाइये सम्पूर्ण पोषण

क्या आप अलसी के बारे में नहीं जानते तो जान लीजिये, क्योंकि ये गुणों की खान है। अलसी (Alsi or Flax Seeds)  तिल के बीज से थोड़े बड़े आकार में होती है। खाने में इसका प्रयोग बेक की जाने वाली रेसिपी पर छिड़क कर या इसे पीस कर लड्डूओं या कुकीज़, केक आदि में प्रयोग किया जाता है। यदि आप बिना अंडे के केक आदि बनाना चाहते हैं तो अंडे के विकल्प के रूप में भी अलसी के पिसे हुए चूरे को या अलसी के बीज को भिगो कर पीसकर प्रयोग कर सकते हैं।

इसमें प्रोटीन, फाइबर, लिग्नन, ओमेगा-3 फेटी एसिड, विटामिन-बी ग्रुप, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक, सेलेनियम आदि तत्व होते हैं। अश्वगंधा व हरी सब्जियों में पाया जाने वाला विटामिन नियासीन भी अलसी में प्रचुरता से होता है।


अलसी रक्तचाप को संतुलित रखती है, कॉलेस्ट्रॉल (LDL-Cholesterol)  की मात्रा को कम करती है, दिल की धमनियों में खून के थक्के बनने से रोकती है, हृदयघात व स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव करती है, हृदय की गति को नियंत्रित रखती है और वेन्ट्रीकुलर एरिदमिया से होने वाली मृत्युदर को बहुत कम करती है। यह कब्ज और बबासीर के लिये बहुत कारगर है।

अलसी के एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं जिससे त्वचा आकर्षक, कोमल, नम व बेदाग रहती है। यह स्वस्थ त्वचा जड़ों को भरपूर पोषण दे कर बालों को भी स्वस्थ, चमकदार व मजबूत बनाती है।

अलसी के बीज के चमत्कारों का हाल ही में खुलासा हुआ है कि इनमें 27 प्रकार के कैंसररोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाये जाने वाले ये तत्व कैंसररोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम में अलसी का सेवन कारगर है। दूसरा महत्वपूर्ण खुलासा यह है कि अलसी के बीज सेवन से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा तीव्रतर होती है।

कैसे खायें अलसी के बीज
अलसी को धीमी आँच पर हल्का भून ले्ं। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख ले्ं। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ ले्ं। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिये, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिये थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखे्ं। अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए्। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा माँगता है।

एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आँच पर पकायें जब तक कि यह पानी आधा न रह जाये। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करे्ं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा आदि के उपचार में उपयोगी है।

अलसी के बीज के चूरे को रोटी, दूध, दाल या सब्जी की ग्रेवी में मिलाकर खाया जा सकता है। प्रति व्यक्ति पाँच ग्राम से दस ग्राम तक अलसी का खाना स्वास्थ्य के लिये गुणकारी रहता है।

अलसी को नमक लगे पानी में भिगो कर फिर सूखाकर सेक लें, फिर इसे खाना खाने के बाद मुखवास के तौर पर भी खाया जा सकता है।
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विशेष : अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एसिड थायरायड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने में आवश्यक भूमिका निभाता है। हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को अलसी और अलसी के तेल का प्रयोग जरूर करना चाहिये।
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गर्मी में आप इसकी मात्रा आधी कर लें। 

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

की-बोर्ड से पाइए मुक्ति

समय है की-बोर्ड से 99% मुक्ति पाने का। जब आप फेसबुक पर कोई लम्बी पोस्ट लिखते हैं तो आपकी अंगुलियाँ थकने लगती हैं या मोबाइल की किसी भी एप्लीकेशन में ज़्यादा लिखना पड़े तो ये विचार मन में आता ही है कि कोई ऐसा उपाय हो कि फटाफट लिखना हो जाये।

तो ये बिल्कुल संम्भव है और इसके लिए किसी भारी भरकम एप की भी जरूरत नहीं। बस, दो मिनट दीजिये और आपका ‘निजी सचिव’ यानि आपका एंड्रॉयड मोबाइल आपकी आवाज पर फटाफट टाइप करेगा।

प्रक्रिया आसान है।
सबसे पहले Setting में जायें।
Language & input को टच करें।
Automatic को अनटिक करें।
भाषाओं की सूची सामने होगी।
नीचे की तरफ जायेंगे तो हिन्दी (भारत) को सिलेक्ट कर लें।
वापस language & input पर आयें।

Google Voice Typing को ऑन कर दें।
अब कोई एप्लीकेशन खोलें जिसमें आपको कुछ लिखना हो। की-बोर्ड प्रकट होगा। अब देखिये स्पेस बार के बाँयीं ओर या की-बोर्ड के ऊपरी तरफ दाहिनी ओर एक छोटा -सा माईक दिखाई देगा।
इसे टच करेंगे तो की-बोर्ड ग़ायब हो जायेगा और बड़े आकार का माईक सामने होगा। माईक के ऊपर हिन्दी भारत लिखा होगा और नीचे Speak Now या अब बोलें ।
बस, अब आप अपने मोबाइल को पास में लेकर वह सब बोलना शुरू कर दीजिये और आपका निजी सचिव फटाफट उसे टाइप करता जायेगा।

( ये सुविधा केवल नेट ऑन होने पर ही मिलेगी)
स्क्रीन शॉट्स के माध्यम से भी आप इस प्रक्रिया को पूरी कर सकते हैं।
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– संजय कुमार शुक्ला

मंगलवार, 28 जून 2016

बिच्छु काटने पर तुरंत आराम के लिए 4 रामबाण उपाय

गाँवों या शहरों में अक्सर कच्ची जगह या बरसात में घर में बिच्छू निकल आते हैं, अगर ये काट ले तो भयंकर पीड़ा होती है, और इनके ज़हर चढ़ने का भी खतरा रहता है, ऐसे में ये रामबाण उपाय सिर्फ 2 मिनट में ज़हर को उतार देगा और दर्द शांत कर देगा...! आइये जाने इस रामबाण उपचार को-

1. बिच्छू के काटने पर रामबाण फिटकरी का प्रयोग
  • फिटकरी को किसी साफ़ किये हुए पत्थर पर, थोड़ा सा पानी डालकर चंदन की तरह घिसें... फिर जहाँ पर बिच्छु ने काटा हो वहाँ पर इस फिटकरी का लेप लगाकर, आग से थोड़ा सेंकें। कैसा भी जहरीला बिच्छु का काटा क्यों न हो, इस फिटकरी के प्रयोग से जहर सिर्फ दो ही मिनट में उतर जाता है।
  • फिटकरी को चिमटी से पकड़ कर थोडा गर्म कर लीजिये, जैसे ही फिटकरी पिघलने लगे तो फिटकरी को बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लगा दीजिये, फिटकरी तुरंत वहाँ चिपक जायेगी, और पूरा ज़हर चूसकर अपने आप उतर जायेगी।


2. बिच्छु काटने पर इमली का बीज
इमली के बीज को साफ़ पत्थर पर घिंसें, घिसते-घिसते अन्दर का सफ़ेद भाग निकल आयेगा तो उसे भी बिच्छु के काटने के स्थान पर लगा देंगे तो यह चिपक जायेगा, जैसे ही नीचे गिरे तो दूसरा बीज घिसकर लगाइये... इस प्रकार बिच्छु का ज़हर उतर जाता है।


3. बिच्छु काटने पर माचिस का मसाला
बिच्छु के डंक मारने पर माचिस की 5-6 तीलियों के मसाले को निकालकर पानी में घोलकरर बिच्छु के डंक लगे स्थान पर लगाने से तत्काल बिच्छु का जहर उतर जाता है। इससे मधुमक्खी व बर्रे के काटने पर लगाने से भी जहर नहीं फैलता और तुरन्त आराम मिलता है।


4. बिच्छू काटने पर सेंधा नमक
बिच्छू के डंक मार जाने पर अगर ज़हर का स्थान ना मिले तो ऐसे में ये उपाय बेहद लाभकारी है। लाहोरी (सेंधा नमक) पंद्रह ग्राम और साफ़ पानी 75 ग्राम आपस में मिलकर साफ़ शीशी में भर कर रखे लें... बस दवा तैयार है... बिच्छु काटने पर आँखों में सलाई (सुरमा लगाने वाली) की सहायता से आँखों में एक एक बूँद डाल दीजिये, कुछ ही मिनटों में ज़हर उतर जायेगा... ये प्रयोग अन्य प्रयोगों के साथ भी किया जा सकता है।

बिच्छु काटने पर विशेष

1. उग्र विष वाले बिच्छु जिसकी दुम धरती पर घिसटती चलती है, के काटने पर, अगर किसी ऐसी जगह काटा हो जहाँ पटी बांध सकें तो बांध दें जैसे की हाथ, पैर या जाँघ पर, जहाँ काटा गया हो वहाँ से चार ऊँगली ऊपर बाँध देना चाहिये फिर उसके चार ऊँगली ऊपर फिर से बाँध दें। ऐसा करने से विष पूरे शरीर में नहीं फैलेगा।

2.यदि डंक दंश स्थान में रह गया हो तो किसी सेफ्टीपिन या चिमटी को आग की लौ में गर्म करने के बाद त्वचा में घुसे हुए डंक को उसकी सहायता से निकाल देना चाहिए और बिना समय नष्ट करें उपरोक्त उपचारों में से एक उपचार कर लेना चाहिये।

3. बारीक़ पिसा हुआ सेंधा नमक को प्याज के टुकड़े से उठाकर दंश-स्थान पर मले, इससे जहर और डंक दोनों दूर होंगे।

मंगलवार, 14 जून 2016

आधार कार्ड में छपी अपनी फोटो भी बदलवा सकते हैं।

आप आधार कार्ड में छपी अपनी फोटो भी बदलवा सकते हैं। इसके लिये आपको बस 15 रूपये खर्च करने होंगे। इसे बदलने के लिये एक साधारण कार्य आपको करना है जो इस प्रकार है-
  • सबसे पहले आपको आधार कार्ड सेंटर जाना होगा। अगर आधार कार्ड आप तक नहीं पहुँच पाया है तो आप अपना इनरोलमेंट नंबर लेकर आधार कार्ड सेंटर जायें।
  • आधार कार्ड सेंटर पर पहुँचकर आपको एक बार फिर आधार कार्ड का आवेदन भरना होगा। इस आवेदन में आपको अपना आधार नंबर भी देना होगा।
  • आवेदन भरने के बाद आपको फिर से अपनी अँगुलियों व आँखों की स्कैनिंग के साथ फोटो खिंचवानी होगी। अगर फोटो सही न आये तो आप दुबारा फोटो खिंचवा सकते हैं।
  • इसके बाद आपकी सारी जानकारी आधार कार्ड सेंटर बेंगलुरू को भेज दी जायेगी, जिसके बाद आपका डाटा प्रोसेस होगा और नई फोटो के साथ आपका आधार कार्ड दो हफ्ते के अंदर आपके घर पहुँच जायेगा।
  • इसके लिए आपको मात्र 15 रुपए खर्च करने होंगे, क्योंकि आधार कार्ड केवल एक बार फ्री बनता है। बॉयोमेट्रिक डीटेल बदलवा कराने के लिए सेंटर पर पैसे खर्च करने होंगे।
अपने बच्चे के आधार कार्ड को सुधार करवा सकते हैं
  • 0 से 5 साल के बच्चे का आधार कार्ड बन जाता है, लेकिन उसका बॉयोमेट्रिक अपडेट नहीं लिया जाता है।
  • पहले कार्ड में माता-पिता का एड्रेस लिया जाता है, जिससे आधार कार्ड बन जाता है।
  • जब बच्चे की उम्र 5 साल से ऊपर हो जाती है, तब बॉयोमेट्रिक अपडेट होता है।
  • फिर 15 साल और 18 साल पूरा कर लेने पर बच्चे के कार्ड में फोटो अपडेट किया जाता है।
पोष्ट के माध्यम से भी करवा सकते हैं आधार कार्ड में बदलाव
  • अगर आपके घर या फिर ऑफिस में ऑनलाइन अपडेशन की सुविधा नहीं है और आप अपने आधार कार्ड की डिटेल्स को पोष्ट के द्वारा भी बदलवा सकते हैं।
  • इसके लिए आपको आधार कार्ड अपडेशन आवेदन भरना होगा।
  • आवेदन भरने के बाद आपको अपने डॉक्युमेंट अटेस्ट करने होंगे और अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी भी डॉक्युमेंट के साथ लगानी होगी।
  • इसके बाद आपको अपना आवेदन आधार कार्ड के रीजनल ऑफिस में भेजना होगा।
  •  UIDAI के भारत में 6 रीजनल ऑफिस हैं-
    1
    Chandigarh

    0172-2711947
    2
    Delhi

    011-23481126
    3
    Hyderabad

    040-23119266, 040-23119911
    4
    Lucknow

    0522-2304979, 0522-2304978
    5
    Mumbai

    022-22163492/94
    6
    Ranchi

    0651-6450145(Ranchi), 
    0612-2545678(Patna)

  • रीजनल ऑफिस में आवेदन भेजने के बाद आपका कार्ड दो से तीन हफ्ते के भीतर अपडेट होने के बाद आपके पास आ जायेगा। 
आधार कार्ड के फायदे
  • अगर आपके पास आधार कार्ड है तो आप आसानी से किसी भी बैंक में एकाउंट खुलवा सकते हैं।... 
  • अपने बैंक अकाउंट को आधार कार्ड से लिंक करने पर आपको सरकार की डीबीटीएल स्कीम में कैश सब्सिडी आसानी से ट्रांसफर हो जायेगी।... 
  • आधार कार्ड की मदद से आप इन्कम टैक्स रिटर्न आसानी से फाइल और वैरिफाई कर सकते हैं, जिसके बाद आपको एक्नॉलेजमेंट आवेदन बेंगलुरू नहीं भेजना पड़ेगा। 
  • पासपोर्ट बनवाने के लिये, गैस और बिजली का कनेक्शन लेने, केवाईसी के लिये आप आधार कार्ड प्रयोग में ला सकते हैं।... 

गुरुवार, 17 मार्च 2016

बायोगैस प्लांट

अब किसी कीरसोई घरमें 4-5घंटे कोगैस सप्लाईमिल सकतीहै


केवल 3000 रु. खर्च करअब किसीकी रसोईघर में4-5 घंटेकी गैससप्लाई मिलसकता है।जी हॉं, हम बातकर रहेहैं, एकअनोखे गोबरगैस प्लांटकी जिसेडिजायन कियाहै श्रीकृष्णराजू ने। श्री राजू मुदिगिरीतालुका केडाराडहली मेंएक वरिष्ठपशु-चिकित्सकके रूपमें कार्यरतरहे हैंउन्हें नईतकनीकियों के विकास में भीकाफी रुचिहै।


इस कम लागतवालेबायोगैस प्लांटकी खासियतयह हैकि इसमेंएक बारकेवल एकबाल्टी गोबरकी आवश्यकताहोती है।इसे तैयारकरने केलिए केवलएक 11 फ़ीटलंबी, 7फ़ीट चौड़ी250 मि.मी. कीप्लास्टिक शीट तथा दो पीवीसीपाइप कीज़रूरत होतीहै। यानि टंकी बनानेके लिएगढ्ढा खोदनेकी ज़रूरतनहीं होती।टंकी कानिर्माण प्लास्टिकशीट द्वाराही कियाजाता है।गोबर-पानीके मिश्रणको पीवीसीपाइप द्वाराडाला जाताहै औरएक घंटेके बादमीथैन गैसका उत्पादनशुरु होजाता है, जो 4घंटों तकचालू रहताहै।

श्री कृष्णराजू केमुताबिक, बॉयोगैसके किसीअन्य प्लांटके निर्माणमें केवल20,000 रु. की आवश्यकताहोती है, जिसमें वार्षिकमेंटिनेंस लागत भी शामित होतीहै, परयह काफीसस्ती हैऔर इसकसंचालन काफीआसान हैऔर एकबार संस्थपितकरने केबाद इसे5-6 वर्षोंतक चालूरखा जासकता है।

श्री कृष्णराजू कहतेहैं किउनक मुख्यउद्देश्य वनोंकी रक्षाकरना है।यदि घरआरसीसी  निर्मित हो तो इस यूनिटको घरके छ्तपर रखाजा सकताहै। उन्होंनेइसे डाराडहलीके डी. एन .वीरेंद्रगौड़ा कीछत परस्थापित कियाहै। उन्हेंअपने गौशालेके गोबरसे प्रतिदिन5 घंटेका बायोगैसईधन प्राप्तहो जाताहै।
गैस का इस्तेमालकरने केबाद गोबरका उपयोगखाद केरूप मेंकिया जाताहै।
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इस बारे मेंविशेष जानकारीके लिएश्री कृष्णराजूसे इसनम्बर परसंपर्क कियाजा सकताहै
मोबाइल: 9448073711

रविवार, 13 मार्च 2016

सेहत के दोहे-90

हृदय रोग सेआपको, बचनाहै श्रीमान

सुरा, चाय याकोल्ड्रिंक, का मत करिये पान।।

सेहत के दोहे-88

जब भी लघुशंका करें, खड़े रहेयदि यार।

इससे हड्डी रीढ़की, होतीहै बेकार।।

सेहत के दोहे-89

सीतल, गर्म जलसे कभी, करिये मतस्नान।

घट जाता हैआत्मबल, नैननको नुकसान।।

सेहत के दोहे-87

मूली खाओ हरदिवस, करेरोग कानाश।

गैस और पाईल्सका, मिटजाये संत्रास।।

सेहत के दोहे-86

सौ वर्षों तकवह जिये, लेत नाकसे सांस।

अल्पकाल जीवें करें, मुँह सेश्वांसोच्छ्वास।।

सेहत के दोहे-85

चैत्र माह मेंनीम की, पत्ती हरदिन खाव।

ज्वर, डेंगू यामलेरिया, बारहमील भगाव।।

सेहत के दोहे-84

हृदय रोग, खॉंसीऔर आँवकरें बदनाम।

दो अनार खायेंसदा, बनेंगेबिगड़े काम।।

सेहत के दोहे-83

लौकी का रसपीजिये, चोकरयुक्त पिसान।

तुलसी, गुड़, सेंधानमक, हृदयरोग निदान।।

सेहत के दोहे-82

भोजन करके खाइये, सौंफ, गुड़और पान।

पत्थर भी पचजायगा, जानैसकल जहान।।

सेहत के दोहे-81

रोज मुलहठी चूसिये, कफ बाहर जाय।

बने सुरीला कंठभी, सबकोलगय सुहाय।।

सेहत के दोहे-80

दूषित पानी जोपिये, बिगड़ेउसका पेट।

ऐसे जल कोसमझिये, सौरोगों कागेट।।

सेहत के दोहे-79

नींबू पानी कासदा, करताजो उपयोग।

पास नहीं आतेकभी, यकृति-आंत केरोग।।

भारतीय गणना

आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!