Nvabihan
रविवार, 22 फ़रवरी 2015
आधुनिक दोहा-3
बचे कहाँ अब शेष हैं, दया-धरम-ईमान।
पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान।।
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आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!
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