बुधवार, 1 जून 2016

छकिन पढ़ना

छकिन पढ़ना : (i) बुरई करना। (बुराई करना)
देख-छाँट के बहू बिहाय हस अउ ‘‘पर कोठा ले आए हे’’ कहिके छकिन पढ़थस तब झगरा नइ मातही ते अउ का होही?

(ii) बेहोश हो जाना। (यथावत)
लहू मा लदफदाए फिरंगी ला देख के बिसाखा के छतनारी उड़ियागे।

छकल-बकल करना

छकल-बकल करना : मनमाने खरचा करना। (खूब खर्च करना)
पइसा के राहत ले छकल-बकल करेस, अब पइसा उरकगे तब चुम।

छइहाँ परना

छइहाँ परना : नजर-डीठ लगना। (कुदृष्टि पड़ना)गाय हा बछरु ला पियात नइ हे मितान, काकरो छइहाँ परे हे तइसे लागथे।

छइहाँ नइ खूँदना

छइहाँ नइ खूँदना : गुँस्सा नइते घिनघिनाना। (गुस्सा या घृणा करना)


जब ले दूनों भाई मा झगरा होए हे तब ले छोटे हा इँकर घर के छइहाँ नइ खूँदे।

सोमवार, 30 मई 2016

वह... वा...!


श्रमदान


छइहाँ खूँदे के धरम नइ होना

छइहाँ खूँदे के धरम नइ होना : चरित्तर मा कीरा परना (चरित्रहीन होना)


गरीब हन ते का भइस; गरीबिच मा जी लेबो फेर जेकर छइहाँ खूँदे के धरम नइ हे तेकर कना हाँत नइ पसारन।

भारतीय गणना

आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!