बी.ए. पढ़इया बनगे बइला ।एम. ए. डिगरी वाले,इहाँ धोवत हे मइला ।बी.काम. करइया,जिनगी मा होगे बेकाम ।एम.ए. वाले मन बर,घलो नइहे काम ।जउन पढ़ेहे बी.ए.सी.,वहू मन हा धोवथे,होंटल मा कप-बसी ।चोरी हारी लेबाँचव संगी,तुँहर मन केमत होवय हाँसी ।खोरबाहरा राम साहू
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कारण और निदान कर्म संस्कृति का जनक है और संवाहक भी। व्यक्तिसः या सामूहिक रुप से किये गये धर्मनिष्ठ कर्म का कालान्तर में पुनरावृत्ति होते रहन...
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