शनिवार, 2 अगस्त 2014

कतका धूर के गोठ

कतका धूर के गोठ : कब के बात। (कब की बात)

कतका धूर के गोठ-गोठियात हस बबा..! आज के लइका मन आना, दू आना ला नइ जाने।

कठवा जाना

कठवा जाना : लकड़ी कस कड़ा हो जाना। (लकड़ी के समान कठोर हो जाना)

बिना सादा दूध डारे पेउँस बनाबे ते नंगत के कठवा जथे।

कठवा के बइला

कठवा के बइला : मुरूख। (मूर्ख)

अरे कठवा के बइला, नहर के पानी ला झुक्खा खेत डाहन नइ चौंका देतेस, भरे हे तीही मा भरत हस, तब का काम के।

कठवा के आँखी अउ पथरा के छाती करना

कठवा के आँखी अउ पथरा के छाती करना : बिपत मा हिम्मत नइ हारना। (विपत्ति के समय अधीर न होना)

होनी ला कोन टारे हे सुकवारो..! ये सब तो भगवान के लीला आए। अब जीए बर तोला कठवा के आँखी अउ पथरा के छाती करे ला परही।

कट्ट खाना

कट्ट खाना : अचंभो मा पड़ना। (आवाक होना)

साँप संग लइका ला खेलत देख के जुरियाए जम्मो मनखे मन कट्ट खागे रिहिन।

कटकट-कटकट करना

कटकट-कटकट करना : गुँस्सा करना। (गुस्सा करना)

बुधारु के ददा हा लइका मन बर कटकटे-कटकट करत रथे।

कछोरा भीरना

कछोरा भीरना : लड़े बर तैयार होना। (लड़ने के लिए उद्यत होना)

बात-बात मा बहू-बेटी के कछोरा भीरना हा बने बात नोहे।

भारतीय गणना

आप भी चौक गये ना? क्योंकि हमने तो नील तक ही पढ़े थे..!